0

गुज़रती है जो हम पर रफ़्तगाँ हम कुछ नहीं कहते  - Afzal Gohar

गुज़रती है जो हम पर रफ़्तगाँ हम कुछ नहीं कहते
तुम्हें आ कर सुनाएँगे यहाँ हम कुछ नहीं करते

हमारी ख़ामुशी के भी कई मफ़्हूम होते हैं
वहाँ भी कुछ तो कहते हैं जहाँ हम कुछ नहीं कहते

ज़मीं के दुख सुनाते हैं ज़मीं की बात करते हैं
कभी अपने लिए ऐ आसमाँ हम कुछ नहीं कहते

कभी दिल से गुज़रती हो कहीं आँखों से बहती हो
तुझे फिर भी कभी जू-ए-रवाँ हम कुछ नहीं कहते

अंधेरे से मज़ा आता है कुछ तकरार करने में
तुझे तो ऐ चराग़-ए-नीम-जाँ हम कुछ नहीं कहते

- Afzal Gohar

Miscellaneous Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Afzal Gohar

As you were reading Shayari by Afzal Gohar

Similar Writers

our suggestion based on Afzal Gohar

Similar Moods

As you were reading Miscellaneous Shayari