tirchi nazar na ho taraf-e-dil to kya karoon | तिरछी नज़र न हो तरफ़-ए-दिल तो क्या करूँँ

  - Agha Hajju Sharaf
तिरछीनज़रहोतरफ़-ए-दिलतोक्याकरूँँ
लैलाकेना-पसंदहोमहमिलतोक्याकरूँँ
ठहरेख़ूँ-बहासू-ए-क़ातिलतोक्याकरूँँ
हक़होजोख़ुद-ब-ख़ुदमिराबातिलतोक्याकरूँँ
इकरंगकोजहाँमेंनहींकोईमानता
हररंगमेंरहूँमैंशामिलतोयाकरूँँ
पिसवाऊँबे-गुनाहजोदिलकोहिनाकेसाथ
पुर्सान-ए-हालहोकोईआदिलतोक्याकरूँँ
परवानाहोनेकीभीइजाज़तनहींमुझे
आलम-फ़रेबहैतिरीमहफ़िलतोक्याकरूँँ
जातागुलू-बुरीदाभीउड़करगुलोंकेपास
बाज़ूगयाहैतोड़केबिस्मिलतोक्याकरूँँ
लैलायेकहकेजल्वादिखातीहैक़ैसको
उड़नेलगेजोपर्दा-ए-महमिलतोक्याकरूँँ
ख़ुदचाहताहूँज़ब्तकरूँँदर्द-ए-शौक़मैं
दिलहीमिराहोमुतहम्मिलतोक्याकरूँँ
मुँहचूमलूँकिगिर्दफिरूँदौड़दौड़के
दिलजोहाथरोकलेक़ातिलतोक्याकरूँँ
दमराह-ए-शौक़-ओ-ज़ौक़मेंलेतानहींकहीं
इसपरभीतयहोजोयेमंज़िलतोक्याकरूँँ
क्यूँँ-करजब्रदिलपेकरूँँअपनेइख़्तियार
राहतमेंपड़ेकोईमुश्किलतोक्याकरूँँ
इकइकसेपूछतेहैंवोआईनादेखकर
माशूक़पाऊँप्यारकेक़ाबिलतोक्याकरूँँ
देदूँमैंराह-ए-इश्क़मेंजानउसकेनामपर
नाचारहूँहोकोईसाइलतोक्याकरूँँ
टाँकेजिगरकेज़ख़्ममेंक्यूँँकरलगानेदूँ
गुलतेरेबाग़काहोमुक़ाबिलतोक्याकरूँँ
आनेकोमनाकरतेहोअच्छाआऊँगा
येतोकहोमानेमिरादिलतोक्याकरूँँ
शायदमुझेजमालदिखादेवोकलीम
नज़्ज़ारेकाहूँमुतहम्मिलतोक्याकरूँँ
मरजाऊँडूबकर'शरफ़'उसपारयारहै
कश्तीहोकोईलब-ए-साहिलतोक्याकरूँँ
  - Agha Hajju Sharaf
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