राह में खड़े हैं तेरा ख़याल कर
पेड़ की तरह ये बाहें निकाल कर
कोई तो आ कर पागल, बोल दे मुझे
बैठा हूँ मैं फेस् पर जुल्फ़ों को डाल कर
चारा-साज दिल की कब-तक दवा करें
दिल में रहने वाले कुछ तो कमाल कर
कैसे देखता मैं तेरे आँख को भला
ठीक ही किया है चश्में को डाल कर
ज़िंदगी ने मेरा ख़ुद ही भला किया
इन ग़मों के हाथों मुझ को उबाल कर
— Ajit Yadav














