tere siva kisi ki tamannaa karunga main | तेरे सिवा किसी की तमन्ना करूँगा मैं

  - Ajmal Siraj

तेरे सिवा किसी की तमन्ना करूँगा मैं
ऐसा कभी हुआ है जो ऐसा करूँगा मैं

गो ग़म अज़ीज़ है मुझे तेरे फ़िराक़ का
फिर भी इस इम्तिहान का शिकवा करूँगा मैं

आँखों को अश्क ओ ख़ूँ भी फ़राहम करूँगा मैं
दिल के लिए भी दर्द मुहय्या करूँगा मैं

राहत भी रंज, रंज भी राहत हो जब तो फिर
क्या एतिबार-ए-ख़्वाहिश-ए-दुनिया करूँगा मैं

रक्खा है क्या जहान में ये और बात है
ये और बात है कि तक़ाज़ा करूँगा मैं

ये रहगुज़र कि जा-ए-क़याम-ओ-क़रार थी
यानी अब उस गली से भी गुज़रा करूँगा मैं

यानी कुछ इस तरह कि तुझे भी ख़बर न हो
इस एहतियात से तुझे देखा करूँगा मैं

है देखने की चीज़ तो ये इल्तिफ़ात भी
देखोगे तुम गुरेज़ भी ऐसा करूँगा मैं

हैरान ओ दिल-शिकस्ता हूँ इस हाल-ए-ज़ार पर
कब जानता था अपना तमाशा करूँगा मैं

हाँ खींच लूँगा वक़्त की ज़ंजीर पाँव से
अब के बहार आई तो ऐसा करूँगा मैं

  - Ajmal Siraj

Aah Shayari

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