एक क़ातिल हुनर से बनाया गया

जब कुल्हाड़ा शजर से बनाया गया

फँस गया आँख के एक हिस्से में मैं
जो यक़ीनन भँवर से बनाया गया

अब हकीमों के बस का नहीं ज़ख़्म जो
उस के तीर-ए-नज़र से बनाया गया

जब अमीरी उड़ी तो लगा पैसे को
बाज़ के जिस्म-ओ-पर से बनाया गया

बेटी की रुख़्सती का ये दस्तूर बस
नारी शक्ति के डर से बनाया गया

सच बताऊँ तो हम दोनों में फ़ासला
एक झूठी ख़बर से बनाया गया

दर्द दिल का मेरे सर पे चढ़ता नहीं
उस का दिल दर्द-ए-सर से बनाया गया

जब निचोड़ा धनक को तो जाना यही
उस के लब के कलर से बनाया गया

उस की शादी में खाया तो कड़वा लगा
शाही टुकड़ा शकर से बनाया गया

— Akhil Saxena

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