shaahsaazi mein riayaat bhi nahin karte ho | शाहसाज़ी में रियायत भी नहीं करते हो

  - Ali Zaryoun

शाहसाज़ी में रियायत भी नहीं करते हो
सामने आकर हुकूमत भी नहीं करके हो

वॉल पर चीखते रहते हो कि मज़लूम हैं हम
और सिस्टम से बगावत भी नहीं करते हो

तुमसे क्या बात करूँ कौन कहाँ क़त्ल हुआ
तुम तो इस ज़ु़ल्म पर हैरत भी नहीं करते हो

अब मेरे हाल पर क्यूँ तुमको परेशानी है
अब तो तुम मुझसे मोहब्बत भी नहीं करते हो

प्यार करने की सनद कैसे तुम्हें जारी करूँ
तुम अभी ठीक से नफ़रत भी नहीं करते हो

  - Ali Zaryoun

Love Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Ali Zaryoun

As you were reading Shayari by Ali Zaryoun

Similar Writers

our suggestion based on Ali Zaryoun

Similar Moods

As you were reading Love Shayari Shayari