जिए हर घड़ी जो किसी के लिए
हमारी ग़ज़ल है उसी के लिए
बटे होंगे जब तक हमारे मकाँ
झगड़ते रहेंगे गली के लिए
दिवाना समझती है दुनिया उसे
लड़े जो अकेले सभी के लिए
ख़ता कुछ हमारी समझ की भी है
धुएँ को चुना रौशनी के लिए
सुना जाएँ कोई लतीफा हमें
है तरसे हुए लब हँसी के लिए
— Ali Mohammed Shaikh















