क्यूँँअंबरकीपहनाईमेंचुपकीराहटटोलें
अपनीज़ातकीबुनतउधेड़ेंसाँसमेंख़ाकसमोलें
धूलमेंलिपटीइसख़्वाहिशकीसारीपरतेंखोलें
धरतीजंगलसहरापर्बतपाँवबीचपिरोलें
अपनेख़्वाबकेहाथोंमेंतकलेकीनोकचुभोलें
किसीमहलकेसन्नाटेमेंएकसदीतकसोलें
एकसदाकेलम्समेंवक़्तकेचारोंखोंटभिगोलें
गूँजमेंलिपटेयादकेकोहनारस्तोंपरफिरहोलें
इकमंज़रमेंइकधुँदलेसेअक्समेंछुपकेरोलें
हमकिसख़्वाबमेंआँखेंमूँदेंकिसमेंआँखेंखोलें