ye aur baat hai tujh se gilaa nahin karte | ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते

  - Amjad Islam Amjad

ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते
जो ज़ख़्म तू ने दिए हैं भरा नहीं करते

हज़ार जाल लिए घूमती फिरे दुनिया
तिरे असीर किसी के हुआ नहीं करते

ये आइनों की तरह देख-भाल चाहते हैं
कि दिल भी टूटें तो फिर से जुड़ा नहीं करते

वफ़ा की आँच सुख़न का तपाक दो इन को
दिलों के चाक रफ़ू से सिला नहीं करते

जहाँ हो प्यार ग़लत-फ़हमियाँ भी होती हैं
सो बात बात पे यूँँ दिल बुरा नहीं करते

हमें हमारी अनाएँ तबाह कर देंगी
मुकाल
में का अगर सिलसिला नहीं करते

जो हम पे गुज़री है जानाँ वो तुम पे भी गुज़रे
जो दिल भी चाहे तो ऐसी दुआ नहीं करते

हर इक दुआ के मुक़द्दर में कब हुज़ूरी है
तमाम ग़ुंचे तो 'अमजद' खिला नहीं करते

  - Amjad Islam Amjad

Duniya Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Amjad Islam Amjad

As you were reading Shayari by Amjad Islam Amjad

Similar Writers

our suggestion based on Amjad Islam Amjad

Similar Moods

As you were reading Duniya Shayari Shayari