बदन की क्या ज़रूरत हिज्र में तो याद ज़िन्दाबाद
तबाही इश्क़ में आशिक़ की ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद
नया जंगल उगाने में कई नस्लें उजड़ती हैं
ओ जंगल लूटने वाले तेरी औलाद ज़िन्दाबाद
ये मुट्ठी भर सफल लोगों पे लानत फेंकते हैं और
'अनंत' ऐलान करते हैं कि हैं बर्बाद ज़िन्दाबाद
— Anant Gupta















