जब कहीं से न हो कोई उम्मीद
नज़र आ जाए इक नई उम्मीद
जब मुझे सब्र आने लगता है
नज़र आ जाती है नई उम्मीद
दिल तुझे सब्र क्यूँ नहीं आता
फिर वही आस फिर वही उम्मीद
कोई उम्मीद जब नहीं होती
होती है एक ख़ुद-कुशी उम्मीद
मौत ही रास्ता निकालेगी
ज़िंदगी से नहीं कोई उम्मीद
दिल मुझे इस क़दर तो ख़्वार न कर
फिर वही शख़्स फिर वही उम्मीद
'सहर' इस शब की भी सहर होगी
बस रही उम्र भर यही उम्मीद
— Anjali Sahar















