एक ग़ज़ल माँ मैं ने ऐसी कह दी है
जो तेरे आँचल के जितनी प्यारी है
सर्दी में वो धूप लगे हल्की-हल्की
पतझड़ में वो बिल्कुल बारिश जैसी है
माँ जिस को सब तेरे जैसी कहते हैं
वो तो बस इकलौती तेरी बेटी है
उस इन्साँ को ग़म की धूप नहीं लगती
जिस के सर पे माँ की छाया होती है
'जस्सर' सच्चा प्यार मिला माँ बाप से ही
बाक़ी हर इक रिश्ता दुनियादारी है
— Avtar Singh Jasser















