ज़िंदगी के निशान से पहले
कुछ न था आसमान से पहले
आग मुमकिन है सर्द हो जाए
बरसे तो आसमान से पहले
फ़ैसला क्यूँ सुनाया मुंसिफ़ ने
मुल्ज़िमों के बयान से पहले
जाएज़ा लेता है फ़ज़ाओं का
हर परिंदा उड़ान से पहले
काश गंगा नहा के धुल जाते
पाप सारे मसान से पहले
मौजज़न आग का समुंदर था
बर्फ़ की इस चटान से पहले
पैर मेरा यहीं फिसलता है
आने वाली ढलान से पहले
मत जता जाने-जान हूँ आख़िर
बाक़ी सब जाने-जान से पहले
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