वफ़ा पे तू जो मरता है
वफ़ा का दाम सस्ता है
तेरे सारे वफ़ा का फल
इन्हीं लोगों में बँटता है
रुकेगा कैसे मेरे पास
उसे तो आगे बढ़ना है
चला जाता है मुझ को छोड़
उसे क्या फ़र्क पड़ता है
वो लड़की चाहती है क्या
ये लड़का सब तो करता है
तुझे वो पूछती भी है
तू जिस की फ़िक्र करता है
बदन ये झूमता है जब
गली से वो गुज़रता है
मेरा घर छोड़ कर वो शख़्स
मेरे दिल में ठहरता है
— Brajnabh Pandey















