0

जब दिल टूटा दीवाने का  - Devdas Bismil

जब दिल टूटा दीवाने का
आग़ाज़ हुआ अफ़्साने का

तब और शम्अ की लौ भड़की
जब जिस्म जला परवाने का

जब अपना ही अपना ही अपना न रहा
तब शिकवा क्या बेगाने का

जब अपने हाथों ज़हर पिया
क्या जुर्म है तब पैमाने का

जब हर दरवाज़ा बंद हुआ
बस वा है दर मयख़ाने का

अब दर्द के मारे कैसे जिएँ
और रस्ता नहीं मर जाने का

जब दिल की जलन बर्दाश्त न हो
क्या सामाँ दिल बहलाने का

उम्मीदें 'बिस्मिल' टूट गईं
क्या समझाना दीवाने का

Devdas Bismil
0

Share this on social media

Miscellaneous Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Devdas Bismil

As you were reading Shayari by Devdas Bismil

Similar Writers

our suggestion based on Devdas Bismil

Similar Moods

As you were reading Miscellaneous Shayari