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याद करना मुहाल लगता है  - Dilshad Naseem

याद करना मुहाल लगता है
हाफ़िज़े का कमाल लगता है

गर्म हाथों से आँच आती है
सर्दियों की वो शाल लगता है

वक़्त हो दोस्त या कोई पल हो
जो भी गुज़रा कमाल लगता है

हब्स इतना है मेरी मिट्टी में
साँस लेना मुहाल लगता है

हिज्र बरसा है आँख से जब भी
मुझ को भादों का हाल लगता है

कौन देखेगा हाथ पर क़िस्मत
बस लकीरों का जाल लगता है

मौसम-ए-इश्क़ आ गया है क्या
दस्तकों का धमाल लगता है

बद-गुमानी है उस की आँखों में
दिल के शीशे में बाल लगता है

Dilshad Naseem
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