खिलते हुए गुलाब से आगे की चीज़ है

वो हुस्न माहताब से आगे की चीज़ है

अब भी उसे हम अपनी ग़ज़ल में न ला सके
अब भी वो इंतिख़ाब से आगे की चीज़ है

कोई भी उस में आज तलक हो सका न पास
ये इश्क़ हर निसाब से आगे की चीज़ है

जाता नहीं ख़ुमार फिर इस का तमाम उम्र
बोसा-ए-लब शराब से आगे की चीज़ है

शाइ'र नया है तो इसे कमतर न जानिए
ये जुगनू आफ़ताब से आगे की चीज़ है

नज़रों में आज सबकी अगर हूँ मैं लाजवाब
तो फिर वो लाजवाब से आगे की चीज़ है

— Divakar divyank

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