बेतरतीब ज़िन्दगी है आजकल
थोड़ी उलझी हुई है आजकल
वो लड़की दिल में रहती थी,
वो ही अजनबी है आजकल
मेरा ग़म तो मेरे साथ है फिर
ये किस की कमी है आजकल
मुस्कराहट नहीं,मेरी आँखें देखो
इन
में काफी नमी है आजकल
कब तक साथ चाहिए था 'ओम'
इश्क़ तो मौसमी है आजकल।
— Om Shukla















