kyuuñ kahooñ main ki sitam ka main saza-waar na tha | क्यूँ कहूँ मैं कि सितम का मैं सज़ा-वार न था

  - Faheem Gorakhpuri
क्यूँकहूँमैंकिसितमकामैंसज़ा-वारथा
दिलदियाथातुझेकिसतरहगुनहगारथा
उम्रभरमुझसेथीहरएककोबे-वज्हख़लिश
क्यूँँकिमैंगुलशन-ए-आलममेंकोईख़ारथा
क्याकुछहोगयाइकग़ैरत-ए-यूसुफ़केलिए
कबमोहब्बतमेंमैंरुस्वासर-ए-बाज़ारथा
क्यायेकरतामिरेज़ख़्म-ए-जिगर-ओ-दिलकाइलाज
चर्ख़-ए-बे-रहमकोईमरहम-ए-ज़ंगारथा
फ़र्दनिकलाफ़न-ए-दुज़दीमेंख़याल-ए-दिलबर
उसकाआनाथाकिपहलूमेंदिल-ए-ज़ारथा
क्याबहलतागुल-ओ-सुम्बुलसेचमनमेंमिरादिल
वोतिरीज़ुल्फ़थायेतिरारुख़्सारथा
अपनीक़िस्मतहीकाशाकीमैंमोहब्बतमेंरहा
शिकवा-ए-चर्ख़थाकुछगिला-ए-यारथा
हश्रकेरोज़मिरेहुस्न-ए-गुनहकायारब
तेरीरहमतकेसिवाकोईख़रीदारथा
तेरीआँखोंकीमोहब्बतकाफ़क़तथाउसेरोग
वर्नाकुछनर्गिस-ए-बीमारकोआज़ारथा
तुमनेमहफ़िलमेंजगहदीउसेहसरतहैमुझे
ग़ैरइसआव-भगतकातोसज़ा-वारथा
नर्गिसउसआँखकीबीमार-ए-गुलउसरुख़पेनिसार
बाग़-ए-आलममेंकिसेइश्क़काआज़ारथा
होगईरस्म-ए-मुलाक़ातचलोबहसहैक्या
तुमख़तापरथेऔरमैंभीवफ़ादारथा
दोप्यालोंमेंहैसाक़ीकेअजबकैफ़'फहीम'
आँखेंमिलतेहीवोथाकौनजोसरशारथा
  - Faheem Gorakhpuri
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Gulshan Shayari

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