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SHER
माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे नेमत — Altaf Hussain Hali
SHER
फ़क़त दो-चार ईदें और बढ़ा दे साल में या रब गले बाबा के लगने को बहाने चाहता हूँ मैं — Haider Khan
SHER
माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है
आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है
Anjum Saleemi
माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है — Anjum Saleemi
SHER
माँ-बाप, बहन-भाई, सब दोस्त, मुहब्बत तुम
सपनों के लिए रिश्ते कुर्बान नहीं करना
Prashant Sitapuri
माँ-बाप, बहन-भाई, सब दोस्त, मुहब्बत तुम सपनों के लिए रिश्ते कुर्बान नहीं करना — Prashant Sitapuri
SHER
ख़ुदा जाने ख़ुदा कैसा ख़ुदा को किस ने देखा है
कहो, तुम भी ख़ुदा माँ–बाप को ही मानते हो ना
Prit
ख़ुदा जाने ख़ुदा कैसा ख़ुदा को किस ने देखा है कहो, तुम भी ख़ुदा माँ–बाप को ही मानते हो ना — Prit
SHER
कल राह में चमकेंगे तेरी रौशनी बनकर
ये मशवरे माँ-बाप के बेकार नहीं हैं
Shakir Dehlvi
कल राह में चमकेंगे तेरी रौशनी बनकर ये मशवरे माँ-बाप के बेकार नहीं हैं — Shakir Dehlvi
SHER
मिले मौका यूँँ ज़िम्मेदारियों को बचपना छीने
ख़ुदाया छीन ले सब कुछ कभी माँ-बाप ना छीने
Aarush Sarkaar
मिले मौका यूँँ ज़िम्मेदारियों को बचपना छीने ख़ुदाया छीन ले सब कुछ कभी माँ-बाप ना छीने — Aarush Sarkaar
SHER
बाप ज़ीना है जो ले जाता है ऊँचाई तक माँ दुआ है जो सदा साया-फ़गन रहती है — Sarfraz Nawaz
SHER
ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ
इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
Munawwar Rana
ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा — Munawwar Rana
SHER
घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा
ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे
Unknown
घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे — Unknown
SHER
सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है
जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माँओं की
Hammad Niyazi
सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माँओं की — Hammad Niyazi
SHER
माँ बाप के आँसुओं की वजह क्या जाने
जो बेटा छुट्टियों में भी घर नहीं आता
Anurag Ravi
माँ बाप के आँसुओं की वजह क्या जाने जो बेटा छुट्टियों में भी घर नहीं आता — Anurag Ravi
SHER
पत्ते बिछड़ कर शाख़ से करते शजर वीरान सा
माँ-बाप को बच्चे बहुत जल्दी करे बूढ़ा यहाँ
Zain Aalamgir
पत्ते बिछड़ कर शाख़ से करते शजर वीरान सा माँ-बाप को बच्चे बहुत जल्दी करे बूढ़ा यहाँ — Zain Aalamgir
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