सभी के दिलों से निकाला हुआ
कहाँ जाएगा यार हारा हुआ
अगर जाएगा अब पुकारा मुझे
नहीं आएगा अब पुकारा हुआ
सवालात कर के मेरे इश्क़ पर
वफ़ा की हया का तमाशा हुआ
मोहब्बत वफ़ा या वो इकरार ही
नहीं याद क्या जान-ए-जाँ क्या हुआ
सभी का रहा मैं बड़ा ही अज़ीज़
सभी का मुझी से किनारा हुआ
हमारा हमारा हमारा ये दिल
तुम्हारा तुम्हारा तुम्हारा हुआ
— harshit karnatak















