महफिलों में मुस्कुराते लोग हैं
देख कैसे ग़म छुपाते लोग हैं
काम पर मैं याद रहता हूँ फ़क़त
बा'द में फिर भूल जाते लोग हैं
जोड़ के तिनका बनाता हूँ महल
और फिर उस को गिराते लोग हैं
देख सपने और पूरा कर उसे
छोड़ कुछ भी बड़-बड़ाते लोग हैं
कोई तो आया नहीं पहले कभी
अब तुम्हारे काम आते लोग हैं
— Murari Mandal















