sang-dil hooñ is qadar aañkhen bhigo saktaa nahin | संग-दिल हूँ इस क़दर आँखें भिगो सकता नहीं

  - Iqbal Sajid
संग-दिलहूँइसक़दरआँखेंभिगोसकतानहीं
मैंकिपथरीलीज़मींमेंफूलबोसकतानहीं
लगचुकेहैंदामनोंपरजितनेरुस्वाईकेदाग़
इनकोआँसूक्यासमुंदरतकभीधोसकतानहीं
एकदोदुखहोंतोफिरउनसेकरूँजी-भरकेप्यार
सबकोसीनेसेलगालूँयेतोहोसकतानहीं
तेरीबर्बादीपेअबआँसूबहाऊँकिसलिए
मैंतोख़ुदअपनीतबाहीपरभीरोसकतानहीं
जिसनेसमझाहोहमेशादोस्तीकोकारोबार
दोस्तोवोतोकिसीकादोस्तहोसकतानहीं
ख़्वाहिशोंकीनज़्रकरदूँकिसलिएअनमोलअश्क
कच्चेधागोंमेंकोईमोतीपिरोसकतानहीं
मैंतेरेदरकाभिकारीतूमेरेदरकाफ़क़ीर
आदमीइसदौरमेंख़ुद्दारहोसकतानहीं
मुझकोइतनाभीनहींहैसुर्ख़-रूहोनेकाशौक़
बे-सबबताज़ालहूकीफ़स्लबोसकतानहीं
यादकेशोलोंपेजलताहैअगरमेराबदन
ओढ़करफूलोंकीचादरतूभीसोसकतानहीं
हाथजिससेकुछआएउसकीख़्वाहिशक्यूँकरूँ
दूधकीमानिंदमैंपानीबिलोसकतानहीं
  - Iqbal Sajid
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