mujhe maaloom hai main saari duniya ki amaanat hooñ | मुझे मालूम है मैं सारी दुनिया की अमानत हूँ

  - Jaan Nisar Akhtar

मुझे मालूम है मैं सारी दुनिया की अमानत हूँ
मगर वो लम्हा जब मैं सिर्फ़ अपना हो सा जाता हूँ

मैं तुम से दूर रहता हूँ तो मेरे साथ रहती हो
तुम्हारे पास आता हूँ तो तन्हा हो सा जाता हूँ

मैं चाहे सच ही बोलूँ हर तरह से अपने बारे में
मगर तुम मुस्कुराती हो तो झूटा हो सा जाता हूँ

तिरे गुल-रंग होंटों से दहकती ज़िंदगी पी कर
मैं प्यासा और प्यासा और प्यासा हो सा जाता हूँ

तुझे बाँहों में भर लेने की ख़्वाहिश यूँँ उभरती है
कि मैं अपनी नज़र में आप रुस्वा हो सा जाता हूँ

  - Jaan Nisar Akhtar

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