इश्क़ तो त्याग करता है हासिल नहीं

इश्क़ शाइ'र बनाता है बुज़्दिल नहीं

आके मेरे बराबर में बैठा है वो
पैरों में बैठने के जो क़ाबिल नहीं

है मोहब्बत तो ख़ुद तू तजस्सुस में रह
बस में मौला के भी ये मसाइल नहीं

सिर्फ़ दिल तेरा लूटेंगे शाइ'र यहाँ
ये तेरे शहर के पब की महफ़िल नहीं

सुन 'कुआनो' तू डूबेगा मँझधार में
दिल की कश्ती का कोई भी साहिल नहीं

— Kuaano Gorakhpuri

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