इश्क़ मत करना तुम इश्क़ में रोना है

ख़ैर अब मुझ को तो बोझ ये ढोना है

क्या बना कर गया कोई इन कमरों को
छुप के रोता हूँ चारों तरफ़ कोना है

मैं ने पत्थर को पारस छू के कर दिया
अब जिसे भी वो छू लेगा सब सोना है

बम्बई वाली बंगाल जैसी ही है
इस की आँखों में भी जादू है टोना है

ये रिवायत पुराने ज़माने से है
सब से प्यारा हो जो बस वही खोना है

वक़्त से अपने तू थोड़ा तो वक़्त दे
आख़िरत में मुझे ही तेरा होना है

— Kuaano Gorakhpuri

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