niklaa jannat se ye kaffaar abhii zinda hai | निकला जन्नत से ये कफ़्फ़ार अभी ज़िंदा है

  - KUNAL
निकलाजन्नतसेयेकफ़्फ़ारअभीज़िंदाहै
ख़ुदातेरागुनहगारअभीज़िंदाहै
कौनकहताहैकिदुनियामेंख़ुशीबाक़ीहै
कौनमानेहैयेसंसारअभीज़िंदाहै
यहाँहरजिस्मकोदरकारहैइकग़ैरबदन
यहाँसबझूठकहेप्यारअभीज़िंदाहै
थोड़ासाऔरअभीखेलोमेरेदिलकेसाथ
शख़्सयेतड़पेहैपरयारअभीज़िंदाहै
चाँदनेरौशनीसूरजसेचुरारक्खीहै
ढलतासूरजकहींउसपारअभीज़िंदाहै
मैंनेकुछलोगभुलानेथेमगरयादआया
दिलकोजोउनसेथावोप्यारअभीज़िंदाहै
जिसकीख़ातिरथाख़रीदाबिकाबसवोही
पेड़काटाथामगरडारअभीज़िंदाहै
तीनदिनपहलेजिसेमाराथातुमलोगोंने
पागलोंकावहीसरदारअभीज़िंदाहै
ग़मउसीकाहैजोहमदर्दबनायाथाकभी
क्याकरूँँजोमेराग़म-ख़्वारअभीज़िंदाहै
इककहानीकिअधूरीरहीकुछऐसेभी
मरेकिरदार,क़लमकारअभीज़िंदाहै
दफ़्नवाँज़िंदामुहब्बतकीहैदीवारचुनी
सालहासालवाँदीवारअभीज़िंदाहै
इकपरीरेतकेटीलेमेंरहाकरतीहै
लोगकहतेहैकियेथारअभीज़िंदाहै
अबजोटूटातोयेफिरसचमेंहीमरजाएगा
दिलयेबसआख़िरीहीबारअभीज़िंदाहै
  - KUNAL
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Pagal Shayari

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