दोजख़ भी जान लेगा वो जन्नत के साथ साथ
जो ज़िंदगी को जान ले औरत के साथ साथ
गर ज़ख़्म दीजियो तो हरापन भी दीजियो
सीरत भी चाहिए मुझे सूरत के साथ साथ
बस इस लिए कि ख़ुद-कुशी भी हादसा लगे
गाड़ी चला के ले गया उजलत के साथ साथ
दाने ज़मीं में गाड़ के ऊपर को देखिए
फिर बादलों को कोसिए क़िस्मत के साथ साथ
ग़ज़लों में ख़ास वक़्त बदलता नहीं है कुछ
मानी मगर बदलते हैं शोहरत के साथ साथ
इक दिन हमारी दोस्ती में प्यार आ गया
इक दिन शराब घुल गई शरबत के साथ साथ
— Lalit Pandey















