जब तक किसी दरख़्त पे पत्ते लगे रहे

सब लोग तो फिर उस के ही पीछे लगे रहे

देखो मियाँ इधर कि वो लड़की गुलाब है
जिस के ही वास्ते ये बग़ीचे लगे रहे

चेहरा दिखाया उस ने कि वो भी नक़ाब में
खिड़की खुली भी यार तो पर्दे लगे रहे

मिलने चले गले वो भी अपने ही आप से
आगे बढ़े तो सामने शीशे लगे रहे

ताज़ी कली खिली है बग़ीचे में यार एक
लेकिन उसी कली पे ही भौंरे लगे रहे

बेटों को आज भी कोई फ़ुर्सत न मिल सकी
मरता है बाप काम में बेटे लगे रहे

ग़म तो कमा लिया है बड़े ज़ोरदार से
इन छोटी छोटी ख़ुशियों के ख़र्चे लगे रहे

— Manas Ank

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