नहीं चलती कभी मर्ज़ी हमारी

बताओ तो ज़रा ग़लती हमारी

जहाँ पर तैरने को कह रहे हो
वहीं पर डूबी है कश्ती हमारी

यहाँ भौंरा कली को खा गया है
कि जो'कर से मरी रानी हमारी

बड़ी मुश्किल से ही हम को मिली थी
उठा ली आपने कुर्सी हमारी

तअल्लुक़ आप का हम से नहीं जब
तो क्यूँ फिर चाटते जूती हमारी

कुआँ कब आएगा इस प्यासे के पास
कि रस्ता देखती खिड़की हमारी

बग़ीचे पर तुम्हें इतना गुमाँ है
रखो तुम फूल है तितली हमारी

बड़ा महँगा बताते थे हमें तुम
लगी बोली यहाँ सस्ती हमारी

— Manas Ank

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