यहाँ पर वो कितना अकेला हुआ है
किसी हाथ का जो खिलौना हुआ है
जिसे आप दिल में बसाए हुए हो
वो दिल से किसी के निकाला हुआ है
कि बचपन से लड़के के नख़रे उठाए
जवानी में लड़का नकारा हुआ है
गुलाबों को देकर हँसाता रहा मैं
अब उस का ही कमरा बग़ीचा हुआ है
जिसे प्यार के ख़त की ख़ातिर थे लाए
वही अब शगुन का लिफ़ाफ़ा हुआ है
— Manas Ank















