कोई मत करना याद मोहब्बत
कर देती है ये बर्बाद मोहब्बत
पहले ये दिल को तड़पाती है
होती है उस के बा'द मोहब्बत
इन बाज़ीचा करने वालों को
लगती भी है आबाद मोहब्बत
जब फ़ुर्सत से बैठो तब सुनना
क्या करती है फ़रियाद मोहब्बत
दिल से करने वालों से पूछो
कितनी है ये आज़ाद मोहब्बत
मैं ने ये माँ से की तब समझा
कैसे है ज़िंदाबाद मोहब्बत
— Manish watan















