uljhta jaa.e hai daaman kisi ka | उलझता जाए है दामन किसी का

  - Manu Bharadwaj

उलझता जाए है दामन किसी का
ख़ुदारा देखिएगा फन किसी का

कहीं ज़ुल्फ़ें संवारी जा रही हैं
पुकारे है मुझे दरपन किसी का

किसी के घर पे ख़ुशियों की फिज़ा है
सुलगता है कहीं गुलशन किसी का

मेरे सीने में तुम कहते हो दिल है
मुझे लगता है ये मदफन किसी का

हमारा घर, हमारा घर नहीं है
किसी की छत तो है आँगन किसी का

न हक छीनो किसी का ऐ लुटेरों
न लूटो इस तरह जीवन किसी का

लबों पे आह थी, आँखों में आँसू
'मनु' गुज़रा है यूँँ सावन किसी का

  - Manu Bharadwaj

Afsos Shayari

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