"ख़ुदा ने तुझे कैसे बनाया होगा"
प्यार से बहुत दिल से बनाया होगा
यार बड़ी मुश्किल से बनाया होगा
चाँद को इंसान में तब्दील किया कैसे
ख़ुदा ने तुझे कैसे बनाया होगा
इक मुद्दत लगी होगी तेरी आँखें बनाने में
कई अरसों में जाके तेरा चेहरा बना होगा
ख़ूबसूरती समेटी होगी सारे जहाँ से उस ने
तब कहीं जाके तेरा लहजा बना होगा
तेरी ज़ुल्फ़ बनाने में कितनी रातें लगी होंगी
तेरा जिस्म कितने ही गुलाबों से बनाया होगा
सँवारा होगा जन्नत की परियों ने तुझे
तेरा नक़्श कितने ही हिसाबों से बनाया होगा
कितने मैख़ाने ख़ाली किए होंगे आँखों में तेरी
तेरा दिल कितने ही हीरों से बनाया होगा
शब-ओ-रोज़ अब यही सोचते गुज़रते हैं मेरे
के यार ख़ुदा ने तुझे कैसे बनाया होगा
ज़रूर तारों से सलाह ली होगी
बादलों की निगरानी में रखा होगा
तुझे तो ज़मीन पे भेजा ख़ुदा ने
पर तेरा बाल तेरी निशानी में रखा होगा
ख़ुद रहगुज़र भी राह देखती है तेरी
फूल तेरे छूने पे महकते हैं
तेरे इशारे पे सहर होती है
परिंदे तेरी आहट पे चहकते हैं
आईना तेरे अक्स पे इतराता है
जुगनू देखते हैं तेरे ख़्वाब रात भर
तेरी ख़ुशबू की दस्तरस में क्या आया
के 'आकर्ष' अब कोसता है गुलाब रात भार
बेशुमार शिद्दत से तेरी रूह बनाई होगी
तेरा हुस्न सादगी से ख़फ़ा हो के बनाया होगा
इक बदन में काइनात क़ैद करी कैसे
ख़ुदा ने तुझे कैसे बनाया होगा















