तू पूछता हैं मुझे कैसा हाल दर्द का हैं

हमारी ज़ीस्त में हर माह ओ साल दर्द का हैं

उदास हो के मैं ने राज़-ए-क़हक़हा पाया
ये जो भी कुछ हैं मिरे पास माल दर्द का हैं

उछल-उछल के मिरे शे'र सुनने वाले सुन
मिरा कमाल नहीं हैं कमाल दर्द का हैं

मचा रखी हैं धमाचौकड़ी कलेजे में
ये रक़्स दिल का नहीं हैं धमाल दर्द का हैं

ये बात कैस ने मुझ से कही थी याद रहे
उरूज कुछ भी हो लेकिन ज़वाल दर्द का हैं

— Moin Hasan

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