दुखों का बोझ ढोना लाज़मी है

अभी बस मौन होना लाज़मी है

कोई समझे नहीं तकलीफ़ को जब
अकेले छिप के रोना लाज़मी है

न हम में कुछ रहा पहले के जैसा
हमारा दूर होना लाज़मी है

अभी टूटा है दिल ताज़ा हमारा
अभी ये रोना धोना लाज़मी है

तुम्हारा इश्क़ पहला है ये प्यारे
तुम्हारा चैन खोना लाज़मी है

अभी शुरुआत है इस ज़िंदगी की
अभी सपने पिरोना लाज़मी है

— Murari Mandal

More by Murari Mandal

Other ghazal from the same pen

See all from Murari Mandal →

Gham Shayari

Shers of gham.

All Gham Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling