किसी आहट से दहला है मिरा मन
कि बस इतना ही छोटा है मिरा मन
मेरे हुजरे में तन्हाई पड़ी है
मेरी चौखट पे सोता है मिरा मन
ग़लत हो बात फिर भी मानता है
कोई ऐसे भी रखता है मिरा मन
ख़ुशी मिलती थी जिस से मिल के कल तक
उसे अब मिल के रोता है मिरा मन
— Murari Mandal















