मेरे दिल की सारी बातें समझा करता है कोई
आख़िर ऐसी बातों पर भी झगड़ा करता है कोई
तेरी बातें मेरे दिल पर ऐसे दर्ज हुई हैं आज
जैसे दीवारों पर पर्चे चस्पा करता है कोई
फीकी बोली तिरछी नज़रें बातों में है गरमा गर्मी
तुम ही देखो साथ हमारे कैसा करता है कोई
पहले मुझ को सीने से चिपकाया है और फिर तू ने
ऐसे वार किया है जैसे अपना करता है कोई
पेड़ खरोंचे फूल भी कुचले चिड़िया के भी पर नोचे
पैसा जेब में हो तब देखो क्या क्या करता है कोई
एक महीने मेरे घर पर एक महीने तेरे घर
तू ही बतला माँ का ऐसे हिस्सा करता है कोई
उस सेे बात करो तो पैहम ऐसे नख़रे करता है
जैसे बातें करके हम पर क़र्ज़ा करता है कोई
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