कर दिया है वार तेरी चाल पर
आ गए आशिक़ सभी हड़ताल पर
तू बुरा माने न तो कुछ पूछ लूँ
बाल किस का है ये तेरी शाल पर
रूह की परछाइयों को क्या पता
क्या लिखा है आदमी की खाल पर
आज मुझ को आ गई कैसे हँसी
फूल कैसे खिल गया इस डाल पर
अब गुज़ारा हो तो हो कैसे बता
बात भी करना मना है काल पर
पूछो मत तुम क्या हुआ कैसे हुआ
छोड़ दो तुम मुझ को मेरे हाल पर
वक़्त आ पहुँचा है अब तुम खींच दो
आन बैठा है परिंदा जाल पर
रोक ले जाने से हम को और फिर
होंठ रख दे तू हमारे गाल पर
एक चिठ्ठी ने हमें तड़पा दिया
चैन से बैठे थे हम चौपाल पर
— Piyush Paiham














