कुछ दिनों तक मुझ को खाना था खिलाया भाई ने
आज मुझ को याद ये सब कुछ दिलाया भाई ने
जब ग़रीबी थी मेरे घर पर तो मुझ को याद है
और तो जो थे सो थे पर दिल जलाया भाई ने
साल भर पहले ही तो आई है उस की दिलरुबा
साल भर में बीस सालों को भुलाया भाई ने
चंद सिक्के और इक माशूक भी है साथ में
तू बता परदेस जाकर क्या कमाया भाई ने
राज़ है क्या इस
में कोई चाल है क्या इस
में कोई
सोच ले पैहम तुझे क्यूँ है बुलाया भाई ने
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