हम को बस अपना ही कहते रह गए

आप भी बातों में हल्के रह गए

एक अफ़सर उस को ले कर चल दिया
दौड़ में हम सब से पीछे रह गए

दस्तकें आती रहीं दरवाज़े पर
और हम रस्सी से लटके रह गए

मैं कमी रिश्तों में गिनता रह गया
हाथ में पैसे ही पैसे रह गए

ठंड में इक लाश बच्चे की मिली
ठंड में सपने सिकुड़ते रह गए

देश में आज़ादियों का दिन मना
और सड़कों पर तिरंगे रह गए

दोनों बच्चे बस चुके हैं शहर में
गाँव में माँ बाप बूढ़े रह गए

एक सीधा रास्ता था मौत का
ज़िंदगी में क्यूँ भटकते रह गए

वो यहाँ पर आई आ कर जा चुकी
सारे लड़के उस को तकते रह गए

— Piyush Paiham

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