मैं पूछता हूँ जान तुझे चाहिए है क्या
वो बोलती है आए बड़े चाहिए है क्या
वो जानती है मुझ को उसे जानता हूँ मैं
बस जानते नहीं हैं किसे चाहिए है क्या
दोनों ही ख़ुश मिज़ाज है दोनो ही हम ख़याल
लानत है गर पता न चले चाहिए है क्या
तुम हम सफ़र तो ढूँढो मगर ध्यान ये रहे
जो चाहिए है तुम को उसे चाहिए है क्या
दुनिया तेरे ज़ुहूर से रौशन रहे 'कमाल'
जलते हुए चराग़ तले चाहिए है क्या
— Abuzar kamaal















