कहीं भी किसी से सुनोगे

सुनोगे लगाते बुझाते

अगर सच बताना बुरा है
मुझे तू बुरा ही समझ ले

शुरू से हमें सच पता है
हवा से भरे हैं लिफ़ाफ़े

हक़ीक़त है क्या सब पता है
बुरा है वही बस जो कह दे

बताना उसी को जो समझे
सुनाना उसी को जो सुन ले

जो पूछे कहा है ये किस ने
ये कहना बताया है उस ने

जियो जिस लिए जी रही हो
भला डर रही हो तो किस से

कहो किस लिए जी रही हो
अगर मर गई हो तो किस पे

— Abuzar kamaal

More by Abuzar kamaal

Other ghazal from the same pen

See all from Abuzar kamaal →

Sach Shayari

Shers of sach.

All Sach Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling