वो हमें अब तलक जानती है

और फिर यक-ब-यक जानती है

आँखें किस आस में रोई तेरी
दर्द मेरी पलक जानती है

क्यूँ है चेहरे पे फ़िल्टर का पर्दा
ऐब सारे चमक जानती है

मेरी सिगरेट जाने है सीक्रेट
क्या तू मेरी ललक जानती है?

तुम मुसाफ़िर हो तुम को ख़बर क्या
कौन गुज़रा सड़क जानती है

मेरी धड़कन को कब है धड़कना
रात दिन बे-धड़क जानती है

क्यूँ हुआ है कमाल और घाइल
बस कमर की लचक जानती है

— Abuzar kamaal

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