जुलाई में बिछड़ा दिल-ए-हर क़सम से
दिसम्बर में आया मिरे घर क़सम से
मिरे हाँथ का हाल मत पूछ वैरी
कटे हाँथ पानी को छू कर क़सम से
शुरू ही किया था कि कहने लगा वो
ज़रा साँस ले-ले सितमगर क़सम से
कहा शे'र ऐसा कि कहने लगे सब
उठा हाँथ मुझ को मुकर्रर क़सम से
तिरी ख़्वाहिशें पूरी कर देता रौशन
अगर हाँथ होता मुक़द्दर क़सम से
— Raushan miyaa'n















