क्या हमें है मिला वफ़ा कर के
ज़ख़्म उस ने दिए दवा कर के
एक दिन मरना है मुझे लेकिन
मरना भी है ख़ुदा ख़ुदा कर के
कोई उम्मीद अब नहीं बाक़ी
हारना है मुक़ाबला कर के
ये यहाँ का रिवाज़ है आक़ा
ज़हर दो और मुस्कुरा कर के
कौन क़ाइल नहीं तिरा रौशन
लोग कहते हैं फुसफुसा कर के
— Raushan miyaa'n















