डूब के मर गया कहते ही बेचारा कोई
अब नहीं आता नज़र मुझ को किनारा कोई
दीद को आँखें तरस जाती है पागल मेरी
मिल के मुझ को नहीं मिलता है दोबारा कोई
इतना पागल हो गया हूँ मैं मोहब्बत में मियाँ
सोचता हूँ कि वो ही कर दे इशारा कोई
— Raushan miyaa'n
अब नहीं आता नज़र मुझ को किनारा कोई
दीद को आँखें तरस जाती है पागल मेरी
मिल के मुझ को नहीं मिलता है दोबारा कोई
इतना पागल हो गया हूँ मैं मोहब्बत में मियाँ
सोचता हूँ कि वो ही कर दे इशारा कोई
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