बातें फ़ुज़ूल करना मोहब्बत है आजकल
दुनिया के इश्क़ में तो ख़यानत है आजकल
कैसा ये दौर आ गया आता नहीं यक़ीं
बच्चों में और बड़ों में अदावत है आजकल
सुनने में आ रहा है ज़माने से मुझ को ये
तेरी हर एक शख़्स को हसरत है आजकल
सुन कर वो नाम आप का धड़का है दिल मिरा
कैसे कहूँ कि आप से नफ़रत है आजकल
— salman khan "samar"















