हम को प्यास में दरिया ढूँढ़ना होता है

उस के तो हर क़दम पे चश्मा होता है

तितली मेरे लब को चूमने लगती है
मैं ने जब भी उस को चूमा होता है

उस को गले लगा के जब भी आता हूँ
अच्छा ख़ासा इत्र का धंधा होता है

अपने बाप को काम नहीं करने देना
लगभग हर लड़के का सपना होता है

दौलत का लालच तो सब को होगा ही
हर घर में ही कम इक कमरा होता है

तन्हाई में 'शाद' बहुत पी लेता है
अक्सर दीवारों से झगड़ा होता है

— Shaad Imran

More by Shaad Imran

Other ghazal from the same pen

See all from Shaad Imran →

Wahshat Shayari

Shers of wahshat.

All Wahshat Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling