कितनी मुश्किल दास्ताँ है ज़िन्दगी
ख़्वाब का इक आसमाँ है ज़िन्दगी
सच पे नंबर कम मिले है हर दफ़ा
क्या अजब का इम्तिहाँ है ज़िन्दगी
रूह तेरी बस किराएदार है
बोल मत ख़ुद का मकाँ है ज़िन्दगी
नफ़रतें हैं और दुख हैं बस यहाँ
अब बताओ तुम कहाँ है ज़िन्दगी
मान लो तो खेल ही है वरना फिर
मुश्किलों का कारवाँ है ज़िन्दगी
— Shivam Rathore















